शंभू साधारण- _ नारी कब अपने सम्मान की बात करती है है शक्ति, पर कहाँ अभिमान क…
कोशिश की लाख छुपाने की, लेकिन हम भी जान गए देखा जब अधरों का कंपन, धड़कन को पहचान गए। …
पेंसिल की तरह बरती गई घरेलू स्त्रियां फेंकी गईं खीज और ऊब से... मेज और सोच से गिराई…
तेरी ममता तेरा दर्द कोई समझ ना पाया मां । तेरी दूध का कर्ज़ अभी तक कोई चुका ना पाय…
प्रेम सदा सुख की कड़ी, ये तो मीठा रोग। जाने फिर क्यों बेवफा, हो जाते हैं लोग॥ कर ब…
Social Plugin