_ प्रेम दोहे . . . . . . . . . . . . . . . . . . मिलते हैं हम रोज ही, होती है ना बात।…
शंभू साधारण- _ नारी कब अपने सम्मान की बात करती है है शक्ति, पर कहाँ अभिमान क…
कोलाहलपूरित अखिल विश्व,आलोड़ित मन,उन्माद भरे, मदमत्त किए लघु मानव को,लघु उर पर चपल…
हम हरदम सुनते आए हैं प्यार हमें मज़बूती देता पर हमने महसूस किया ये इससे हम कमज़ोर …
वाह !क्या सीन है ?--------------उनका घर कुरुक्सेत्र बना प्रतीत हो रहा था पत्नी अर्जुन…
कोशिश की लाख छुपाने की, लेकिन हम भी जान गए देखा जब अधरों का कंपन, धड़कन को पहचान गए। …
पेंसिल की तरह बरती गई घरेलू स्त्रियां फेंकी गईं खीज और ऊब से... मेज और सोच से गिराई…
तेरी ममता तेरा दर्द कोई समझ ना पाया मां । तेरी दूध का कर्ज़ अभी तक कोई चुका ना पाय…
प्रेम सदा सुख की कड़ी, ये तो मीठा रोग। जाने फिर क्यों बेवफा, हो जाते हैं लोग॥ कर ब…
Social Plugin